मुंबई में गणेश उत्सव के बाद गणेश की मूर्तियों का क्या हाल होता है ! भक्ति और श्रद्धा गई भाड़ में , उत्सव मना लिया और हमारा फर्ज खत्म ! गणेश विसर्जन के दिन तक जिस तरह भक्तों में भगवान के लिए प्रेम उमड़ता है , उसका नतीजा ये होता है ! क्या इसलिए भगवान के प्रति इतना प्रेम दिखाया जाता है ? मूर्तियां भगवान का एक रूप हैं या बस पत्थर - मिट्टी ! अगर उन्हें कूड़े के ढेर पर ही फेंकना होता है , तो इतना सब करने की जरूरत ही क्या है ! क्या आप वाकई चाहते हैं कि इस तरह आपके भगवान को बुल्डोजर घसीट कर दूर फेंक दे ? बस यही सम्मान है ! जिस गणपति बप्पा को बुलाने के लिए हम दिन रात उन्हें याद करते हैं , उन्हें इसलिए बुलाया जाता है ? यह मूर्ति क्या आपको नहीं कह रही है इस हालत पर भगवान भी रोते होंगे ? पूछते होंगे अपने भक्तों से .. ये गत करने के लिए जल्दी बुलाते हो मुझे। इन सवालों के जवाब हमें खुद से मांगने होंगे। बात सिर्फ इन पत्थर - मिट्टी ...
bahut hi accha likha hai,,,,,,,
ReplyDeletenasir saab ne,,,,,,,,,
Nasir kazmee ki rachna bohot achhee lagee..ek kasksi chhod gayi..
ReplyDeleteSwagat hai shubhkamnayonke saath !
गजेन्द्र जी स्वागत और शुभकामनायें, एक नेक सलाह "SNAP" वाली सुविधा(?) हटा सकें तो अच्छा रहेगा, यह व्यवधान पैदा करता है… इसी प्रकार वर्ड वेरिफ़िकेशन भी हटायें… इससे टिप्पणीकार और पाठक को एक "फ़्लो" मिलता है…
ReplyDeleteअक्षय जी व शमा जी आप मेरे ब्लॉग पर आए और अपनी टिपणी दी आच्छा लगा, आपका सुक्रिया.
ReplyDeleteso wonderful blog. ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
ReplyDelete---
आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
---
अमित के. सागर
इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका हिन्दी चिटठा जगत में स्वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को मजबूत बनाने के साथ ही साथ खुद भी बडी उंचाइयां प्राप्त करेंगे। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeletegood. narayan narayan
ReplyDeletedil ke halat ko kitni achi tarah samja hai,koi aye ya na aye intjar to karna hi hai, kyoki is dil ki yahi adat hai
ReplyDelete